राजापुर, चित्रकूट, गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मस्थली, उत्तर प्रदेश में घूमने की सुंदर जगह है

गोस्वामी तुलसीदास जी की जन्मस्थली, राजापुर, चित्रकूट, उत्तर प्रदेश पर्यटन

 

राजापुर की प्रसिद्धि गोस्वामी तुलसीदास  जी (1532-1623 ई) से है| गोस्वामी जी ने श्री राम चरित मानस, हनुमान चालीसा, इत्यादि अनेकों दिव्य साहित्यिक उपहार हमें दिये हैं। उनका जन्म यहीं हुआ था। उत्तर प्रदेश के जिला बांदा में राजापुर में श्रीयमुना नदी के तट पर तुलसी मंदिर, श्री तुलसीदास जी की जन्मस्थली है|

राजापुर में तुलसीदास मंदिर से यमुना नदी का एक दृश्य

गोस्वामी जी एक अभूतपूर्व लेखक-संत थे, और योगी भी। उन्होंने अपने सुबह के व्यायाम को भी प्रभु की भक्ति में ही लीन रखा| वे प्रभु की स्तुति, चालीसा इत्यादि के पाठ से मन की शुद्धि एवं दण्ड बैठक इत्यादि से शरीर शुद्धि  साथ ही कर लेते थे| शरीर को प्रभु भक्ति का साधन जानकर, वे दूसरों को भी शरीर एवं मन बलिष्ठ करने में मार्गदर्शन देते रहे| कहा जाता है कि उनके जीवनकाल में जब प्लेग महामारी ने वाराणसी को घेर रखा था, तब गोस्वामी जी ने अपने शिष्यों सहित, अपनी प्राणशक्ति को योग और आयुर्वेद के माध्यम से सुदृढ़ रखते हुये, प्रतिदिन बीमार और मृतकों की सेवा की| उन दिनों अखाड़े ही शारीरिक फिटनेस सेंटर हुआ करते थे, जहां उनके  शिष्य नित्य दण्ड-बैठक इत्यादि का अभ्यास करते थे| उस समय, गोस्वामी जी अथवा उनके किसी भी शिष्य को प्लेग में पीड़ितों की सेवा के दौरान स्वयं कोई हानि नही हुई| 'हनुमत रक्षा करे प्राण की|'

तुलसीदासजी द्वारा लिखित हनुमान चालीसा, अब तक का उनका सबसे लोकप्रिय उपहार है। उन्होंने काशी में अपने छात्र-काल में इसे लिखा, हनुमान जी से, उन्हें भय से मुक्त करने के लिए एक व्यक्तिगत प्रार्थना के रूप में।

उनकी अन्य साहित्यिक कृतियों में दोहावली, कवितावली, विनय पत्रिका, हनुमान बाहुक, संकट मोचन, जानकी मंगल, पार्वती मंगल और वैराग्य संदीपनी इत्यादि शामिल हैं।

तुलसीदास जी के अयोध्या कांड (श्री रामचरितमानस) का हस्तलिखित संस्करण

उन्होंने राम नवमी के दिन अयोध्या में श्री राम चरित मानस लिखना शुरू किया, और वाराणसी और चित्रकूट में भी रह कर उसे पूरा किया|

गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रामचरितमानस के हस्तलिखित संस्करण का एक अध्याय अभी भी राजापुर में उपलब्ध है। अन्य पुरातन पांडुलिपियों की तरह बर्च ट्री की छाल (भोजपत्र) के बजाय इसे कागज पर लिखा देखकर मुझे आश्चर्य हुआ। कागज पुराना है और एक कवर में संरक्षित है। सुरक्षात्मक आवरण हाल ही में कानपुर में रहने वाले एक सज्जन  व्यक्ति द्वारा प्रायोजित किया गया था।

कैसे पहुंचे राजापुर?
सड़क मार्ग से: मैंने करवी (चित्रकूट, उत्तर प्रदेश, भारत) से राजापुर तक बस की सवारी की थी। यह करवी रेलवे स्टेशन से 40 किलोमीटर दूर है और पहुँचने में लगभग एक घंटा लगता है।

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