August 18, 2010 06:29 by
anisha

प्रश्न : रिश्तों को स्वस्थ रखने का क्या उपाय है?
श्री श्री रवि शंकर : मुझे इस क्षेत्र का अनुभव नहीं है! (हंसी) फिर भी मैं कुछ सलाह दे सकता हूं।
पहली सलाह है महिलाओं के लिये – कभी भी अपने आदमी के अहं को ठेस मत पहुंचाना। हमेशा उसका उत्साह बढ़ाओ, अहं को सहारा दो। चाहे पूरी दुनिया उसे नाकारा कहे, तुम ऐसा मत कहना! तुम उससे कहना कि उसके पास विश्व का श्रेष्ठतम दिमाग है – वो उसका प्रयोग नहीं करता है इसका मतलब ये नहीं है कि उसके पास वो दिमाग नहीं है! तुम्हें हमेशा कहना चाहिये कि वो सर्वश्रेष्ठ आदमी है। हमेशा उसके अहं का पोषण करो। अगर तुम उसे नाकारा कहोगी तो वो सचमुच ऐसा ही हो जायेगा।
अब एक सलाह है पुरुषों के लिये – कभी भी स्त्री की भावनाओं को ठेस मत पंहुचाना। हां, वो कभी कभी अपने घरवालों के बार में शिकायत कर सकती है, अपने भाई के बारे में, अपने पिता या मां के बारे में, पर तुम कभी उसकी बात से सहमति मत जताना। अगर तुमने उसकी बात से सहमति जताई तो वह पलट कर तुम्हें ही बुरा भला कहेगी। कभी भी उसके परिवार की बेइज़्ज़ती मत करना। उसे कभी भी ख़रीददारी करने से या किसी आध्यात्मिक कार्यक्रम में जाने से मत रोकना। अगर वो ख़रीददारी करने जाना चाहे तो उसे अपना क्रेडिट कार्ड दे देना।
अब एक सलाह, दोनों के लिये – कभी भी एक दूसरे से प्रेम का प्रमाण मत मांगना। ये मत पूछना, ‘क्या तुम मुझे सचमुच प्रेम करते हो? तुम मुझे पहले जैसा प्रेम नहीं करते।’ अपने प्रेम को प्रमाणित करना बहुत बोझिल कार्य है। अगर कोई तुम से कहे कि अपने प्रेम को प्रमाणित करो तो तुम कहोगे, ‘हे भगवान! मैं इस व्यक्ति को कैसे बताऊं?’ हर काम कुछ ख़ास अदाज़ में और मुस्कुराते हुये करो।
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Photo credit: Amala Saci
नन्दलाल गोपाल दया कर के वृन्दावन मोहे बसा लेना; आंखों से पर्दा हटा मोहे, निज रूप का दर्श दिखा देना
१. धन धाम ना मांगू तुझसे कभी, कोई और ना आस मुराद मेरी; मोहे चरणों मे अपने बिठा लो हरि, मोहे नाम का जाप सिखा देना
२. जी चाहता है तेरी सेवा करूं, तेरी सांवरी सूरत देखा करूं; तेरे चरणों को धो धो पिया करूं, मोहे चरणों की दासी बना लेना
३. मायाजाल में मैं तो ऐसी फंसी, तेरा नाम ही लेना भूल गई; मेरी अंत में होगी क्या ही दशा; मोहे बांके बिहारी बचा लेना
४. मिले भक्तों के काम से समय अगर, दासी पे करना दया की नज़र; जब उमड़ेगा भव का सागर, मोहे आ के पार लगा देना
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नन्दलाल गोपाल दया कर के वृन्दावन मोहे बसा लेना; आंखों से पर्दा हटा मोहे, निज रूप का दर्श दिखा देना
१. धन धाम ना मांगू तुझसे कभी, कोई और ना आस मुराद मेरी; मोहे चरणों मे अपने बिठा लो हरि, मोहे नाम का जाप सिखा देना More...
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४१.
अन्त रहौ किधौं अन्तर हौ दृग फारे फिरौं कि अभागिन भीरूं।
आगि जरौं या कि पानी परौं, अहओ कैसी करौं धरौं का विधि धीरूं॥
जो ‘घनआनन्द’ ऐसौ रूची, तो कहा बस हे अहो प्राणन पीरूं।
पाऊं कहां हरि हाय तुम्हें, धरनी में धंसूं कि अकाशहिं चीरूं॥
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४०.
संकर से मुनि जाहि रटैं चतुरानन चारों ही आनन गावैं।
जो हिय नेक ही आवत ही मति मूढ़ महा ‘रसखान’ कहावैं॥
जापर देवी ओ देब निह्हरत बारत प्राण न वेर लगावैं।
ताहि अहीर की छोहर्या छछिया भर छाछ पै नाच नचावैं॥
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नी आवो सैयों रल देयो बधाइयां, मेरा पीर मेरे घर आया
असमान दा तारा मेरी झोली डिगेया, मेरे रब ने सबब बनाया
अज होणा दीदार माही दा, अज होणा दीदार…
अज माही ने औणा ए औणा, अज माही ने औणा
अज होणा दीदार माही दा, अज होणा दीदार…
अज हवांवा मिठ्ठियां वगना, अज धरती ने दुल्हन सजना
करना हार श्रंगार माही दा More...
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ॐ नमः शिवाय
भोलेनाथ, भोलेनाथ
तेरी रचना है न्यारी, तू ही जाने त्रिपुरारी
साजी तूने रंगीली क़ायनात More...
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