Naiharwa by Rishi Nityapragya, Art of Living video

January 22, 2012 10:06 by anisha

Sung by Rishi Nityapragya, a senior teacher of The Art of Living. The song was composed by Saint Kabir, and made popular by Kailash Kher.


 


Raga Bhoop, Art of Living bhajan, Hari sunder nand mukunda

January 22, 2012 10:03 by anisha

Composed by Dr Manikanthan


 


Art of Living bhajan by Rishi Nityapragya, Ram nam ladva

January 22, 2012 09:59 by anisha

 


Meera Bai bhajan by Lata Mageshkar, Saanvaraa re mhaari preet nibhaajo ji

January 22, 2012 02:21 by nitin

सांवरा रे, म्हारी प्रीत निभाजो जी

थे छो म्हारो गुण रो सागर

अवगुण म्हार बिसराजो जी

सांवरा रे, म्हारी प्रीत निभाजो जी…

 

 


 


Meera Bai Bhajan by Pandit Mallikarjun Mansur in Raga Bhairavi, Mat ja jogi

January 22, 2012 01:31 by nitin

मत जा, मत जा, मत जा जोगी

पांव परूंगी मैं तेरे, जोगी मत जा, मत जा, मत जा

प्रेम भक्ति को * न्यारो, हमको गल बता जा, मत जा, मत जा

अगर चंदन की चिता रचाई, अपने हाथ जला जा,

जोगी मत जा, मत जा, मत जा

* भई भस्म की ढेरी, अपने अंग लगा जा,

जोगी मत जा, मत जा, मत जा

मीरा के प्रभु गिरधर नागर, ज्योति में ज्योत मिला जा,

जोगी मत जा, मत जा, मत जा


 


Meera Bai bhajan by Vani Jairam, Shyam mane chaakar raakho ji

January 22, 2012 01:27 by nitin

श्याम मने चाकर राखो जी,

चाकर रहसूं, बाग लगासूं नित उठ दर्सन पासूं

बृंदाबन की कुंज गलिन में तेरी लीला गासूं

श्याम मने चाकर राखो जी,

चाकरी में दर्सन पाऊं, सुमिरन पाऊं खरची

भाव भक्ति जागीरी पाऊं, तीनों बातां सरसी

श्याम मने चाकर राखो जी,

मोर मुकुट पीतांबर सोहे, गल बैजन्ती माला

बृन्दावन में धेनु चरावे मोहन मुरली वाला

श्याम मने चाकर राखो जी,

मीरा के प्रभु गहिर गंभीरा सदा रहो जी धीरा

आधी रात प्रभु दर्सन दीन्हें प्रेम नदी के तीरा

श्याम मने चाकर राखो जी


 


Meera Bai bhajan by Vani Jairam, Bala mai vairagan houngee

January 22, 2012 01:24 by nitin

Meera Bai bhajan lyrics

बाला मैं बैरागन हो‍ऊंगी

जिन भेषां मेरा साहब रीझे, सो ही भेष धरूंगी

बाला, मै बैरागन हो‍ऊंगी

कहो तो कुसुमल साड़ी रंगावा, कहो तो भगवा भेस

कहो तो मोतियां मांग भरावां, कहो छिटकावां केस

बाला, मैं बैरागन हो‍ऊंगी

प्राण हमारा वहां बसत है, यहां तो खाली खोल

मात पिता परिवार सूं कहिअ तिनका तोड़

बाला, मैं बैरागन हो‍ऊंगी

जिन भेषां मेरा साहब रीझे, सो ही भेष धरूंगी

बाला मैं बैरागन हो‍ऊंगी