January 21, 2012 12:05 by
anisha
होरी खेल रहे हैं गुरुवर, अपने हरि भक्तों के संग,
हरि भक्तों के संग, अपने हरि भक्तों के संग
१. खेल रही हैं होरी, कर कर के हुड़दंग
गुरु हमारे खेलें होरी, करते रहें सत्संग
२. धर्म के कर में हो पिचकारी, भर विवेक का रंग
जिसके हृदय लगे ये निशाना, वह रह जाये दंग
३. ज्ञान गुलाल मलत मुख ऊपर, प्रेम का भर क रंग
पिया है जिसने वही हुआ है सदगुरु के … संग
४. कान्हा खेल रहे हैं होरी राधाजी के संग
सीता के संग रघुवर खेलें, भीजत हैं सब अंग
70fbba81-5d45-420d-bc7a-19434f08c95e|0|.0