इकली बन में घेरी आन, श्याम तने कैसी ठानी रे
श्याम मोहे बृन्दाबन जानो रे, लौट के बरसाने आनो रे
जो होई देर अबेर, लड़े घर सास-जिठानी रे
इकली बन में घेरी आन, श्याम तने कैसी ठानी रे
दान तू दधि को दे जा मोय, गूजरी मैं समझाऊं तोय
जो नहीं माने बात, होयगी ऐचा तानी रे
इकली बन में घेरी आन, श्याम तने कैसी ठानी रे
कहूंगी कंस राजा से जाय, हेकड़ी सब तेरी रह जाय
बात हमारी मान, नहीं तो फिर होय बदनामी रे
इकली बन में घेरी आन, श्याम तने कैसी ठानी रे
In this folk song from Vrindavan, Krishna has waylaid a Gopi on her way to Vrindavan to sell fresh yogurt. Krishna asks for some yogurt, over which the above conversation occurs.
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