चलो सखी सौतन के घर जइहें
मान घटे तो का घट जइहे, पी के दर्सन पइहें
ये जोवन अंजुरी को पानी, समो गये पछ्तैये
प्रभु दरश परस कर मन की तपत बुझइहें
चलो सखी सौतन के घर जइहें
मान घटे तो का घट जइहे, पी के दर्सन पइहें
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