October 21, 2010 02:30 by
anisha
रब्बा, हाय रब्बा…
तू हथ्थां विच हथ फड़ेया, अड़ेया छड्डी ना
मैं विच चनाब दे सोहणी, वे घड़ेया छड्डी ना
तेरे हथ विच जेड़ी लकीर ए अज तों मेरी हो गई
शाला, तूं वी हो जा मेरा, मैं तां तेरी हो गई
रब्बा, हाय रब्बा…
तेरे कदमा विच सिर मेरा, मैं सजदे करनी हां
हुण जो होणाये सो हो जाय
मैं ना डरदी हां
मेरे अंदर दी कमज़ोरी, अज दिलेरी हो गई
शाला तू वी हो जा मेरा, मैं तां तेरी हो गई
रब्बा, हाय रब्बा…
मैं किन्नी ख़ुशकिस्मत हां, मेरा दिल जाणे
वे तेरे दिल विच की है, तेरा रब जाणे
मेरी बाकी बची अखीर वी हुं तां तेरी हो गई
शाला, तूं वी हो जा मेरा, मैं तां तेरी हो गई
रब्बा, हाय रब्बा…
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