October 7, 2010 12:52 by
anisha
४४.
केहि पापसों पापी न प्राण चलैं अटके कित कौन विचारलयो।
नहिं जानि परै ‘हरिचन्द’ कछू विधि ने हमसों हठ कौन ठयो॥
निसि आज हू हाय बिहाय गई बिन दर्शन कैसे न जीव गयो।
हत भागिनी आंखन सों नित के दुख देखबे को फिर भोर भयो॥४४॥
More Braj ke sawaiya/dohe
04cfe526-2ff6-4730-bf47-578ad671c1d1|1|5.0