३२.
ब्रह्म में ढूंढ्यो पुरानन वेदन भैद सुन्यो चित चौगुने चायन।
देख्यो सुन्यो न कहूं कबहूं वह कैसे स्वरूप औ कैसे सुभायन॥
ढूंढत ढूंढत हारि परयो ‘रसखानि’ बतायो न लोग लुगायन।
देख्यो कहां वह कुंज कुटीर में बैठो पलोटन राधिका पायन॥
This sawaiya verse illustrates poet Raskhan’s search for nirgun and sagun Brahman.
8ae8dc01-a8e7-4401-ad3b-5de5fa08582e|2|3.0