Sawaiya verses are part of the rich literary heritage of Braj (Mathura-Vrindavan). They are dramatised in raslila performances.
३४.
द्वार के द्वारिया पौरि के पौरिया पाहरुवा घर के घनश्याम हैं।
दास के दास सखीन के सेवक पार परोसिन के धन धाम हैं॥
‘श्रीधर’ कान्ह भये बस भामिनि मान भरी नहीं बोलत बाम है।
एक कहै सखि वे तो लली वृषभान लली की गली के गुलाम हैं॥
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