प्रेम - श्री श्री रवि शंकर

March 19, 2010 01:03 by anisha

जीवन की हर एक इच्छा के पीछे एक ही मांग है। आप यदि परख् कर देखो कि वो मांग क्या है, तो निश्चित रूप से मालुम पड़्ता है कि वह है ढा़ई अक्षर प्रेम क।

सब कुछ हो जीवन में, पर प्रेम न हो, तब जीवन जीवन नहीं रह जाता। प्रेम हो, और कुछ हो या न हो, फिर भी तृप्ति रहती है जीवन में, मस्ती रहती है, आनन्द रह्ता है, है कि नहीं?

~ श्री श्री रवि शंकर

from a commentary on Narad Bhakti Sutra


 



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