नज़र उठाओ ज़रा तुम, तो कायनात चले है इन्तज़ार कि आँखों से कोई बात चले... तुम्हारी मर्ज़ी बिना वक्त भी अपाहज है ना दिन खिसकता है आगे, ना आगे रात चले