1.4 बालकाण्ड, दैनिक रामायण जी का पाठ #श्रीरामचरितमानस #baalkand शत्रु पर विजय हेतु संपुट के साथ

बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ ॥
पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें ॥
हरि हर जस राकेस राहु से। पर अकाज भट सहसबाहु से ॥
जे पर दोष लखहिं सहसाखी। पर हित घृत जिन्ह के मन माखी ॥
तेज कृसानु रोष महिषेसा। अघ अवगुन धन धनी धनेसा ॥
उदय केत सम हित सबही के। कुंभकरन सम सोवत नीके ॥
पर अकाजु लगि तनु परिहरहीं। जिमि हिम उपल कृषी दलि गरहीं ॥
बंदउँ खल जस सेष सरोषा। सहस बदन बरनइ पर दोषा ॥
पुनि प्रनवउँ पृथुराज समाना। पर अघ सुनइ सहस दस काना ॥
बहुरि सक्र सम बिनवउँ तेही। संतत सुरानीक हित जेही ॥
बचन बज्र जेहि सदा पिआरा। सहस नयन पर दोष निहारा ॥
दो. उदासीन अरि मीत हित सुनत जरहिं खल रीति।
जानि पानि जुग जोरि जन बिनती करइ सप्रीति ॥ ४ ॥

Daily Ramayana reading series/playlist

Easy to read and sing along.
Easy to teach children how to read the Ramayan original text by Goswami Tulsidasji
Encourages even a non-singer to read Sri RamCharitmanas by themselves!
Jai Sri Ram! Jai Hanuman! Jai Gurudev!
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1.4 बालकाण्ड, दैनिक रामायण जी का पाठ  #श्रीरामचरितमानस  #baalkand शत्रु पर विजय हेतु संपुट के साथ
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